।। जो कोशिश करतें हैं उनकी कभी हार नही होती।।

यह पंक्तियाँ मेरे दिल के काफी करीब हैं और जिसे पढ़कर मुझे ही नही बल्कि मैं मानती हूँ सभी को बहुत प्रेरणा मिलती होगी , जब भी कोई काम  बहुत मुश्किल लगता है या जिसे करने से पहले ही मन में एक डर सा रहता कि पता नहीं मै सफल हो पाऊँगी या नहीं ,मैं इस रचना के सानिध्य में आ जाती हूँ  इस रचना को पढ़कर मुझे इतना हौसला और साहस मिलता है कि मेरा सारा डर कहाँ जा कर छुप जाता है, पता ही नहीं चलता….इस कविता में कवि ने यथार्थ का चित्रण बड़ी ही खूबसूरती से किया है मेरी पसंदीदा रचनाओं में से एक “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”हरिवंश राय बच्चन” की एक बहुत ही सुन्दर और प्रेरणादायक रचना है,  शायद आप में से कई लोगों ने इसे पहले भी पढ़ा हो और जिन्होंने नहीं पढ़ा है मैं चाहूंगी कि जरुर पढ़े , जब भी भविष्य को लेकर मन में उहापोह की स्थिति होती है और मन बहुत विचलित होता है, ये कविता ही है जो हमे हौसला देती है, और कार्य करने के लिए प्रेरित करती है….

 

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,

चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है ।

मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,

चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है ।

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती । डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,

जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है ।

मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,

बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में ।

मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती । असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,

क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो ।

जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,

संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम ।

कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।।

 

आज के संदर्भ में भी यह कविता अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, इतिहास में कितने ही उदाहरण इस कोशिश शब्द को सार्थक करते हुए हमें मिल जाएंगे। परंतु वर्तमान परिस्थितियों में भी इस शब्द की गरिमा कम नही आँकी जा सकती।कोरोनकाल की विषम परिस्थितियों में भी मानवता की प्रत्येक कोशिश देखने लायक है , सर्वत्र परिदृश्य परिवर्तित होते हुए दिखाई दे रहे हैं छोटे छोटे बच्चे नई टेक्नोलॉजी से रूबरू होते हुए दिखाई देते हैं बड़े बच्चे अपनी तकनीकी बुद्धि कौशल को ओर आगे ले जा रहे हैं इन सभी बातों एवं दृश्यों  से एक बात तो पूर्ण स्पष्ट हो गई है कि जीवन को इस महामारी ने जितना विचलित करने की कोशिश की उतनी ही कोशिश प्राणी मात्र ने इससे उबरने की ,इससे ये पूरी तरह सिद्ध होता है कि कोशिश करने वालों की कभी हार हो ही नही सकती और कवि की हर पंक्ति मानो आज के परिपेक्ष्य को ध्यान में रख कर लिखी गई हों। अनुमान लगाये कितना समृद्ध औऱ भावपूर्ण साहित्य है कितनी बहुआयामी ओर प्रतिभा सम्पन्न है हमारी संस्कृति।

धन्य हैं हम सभी लोग

जिन्होंने इस साहित्य और संस्कृति को प्राप्त किया तथा अपने में आत्मसात किया।

अर्चना गौर

 

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