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संस्कृत : संस्कार और संस्कृति

BY ADMIN PUBLISHED August 27, 2022, UPDATED January 13, 2023

संस्कृत भाषा सबसे प्राचीन भाषा है तथा इसकी जड़ें भारत में हैं | यह हमारी संस्कृति एवं संस्कारों की प्रतीक है | इसे सभी भाषाओँ की जननी तथा  सबसे व्यवस्थित और तकनीकी भाषा माना जाता है। सैकड़ों साल पहले भारत के उच्च विद्वानों और संतों द्वारा  लिखी गई किताबें अब भी पढ़ी जा रही हैं और उन पर शोध किया जा रहा है। यहाँ कुछ तथ्य दिए गए हैं जो दर्शाते हैं कि आखिर यह भाषा इतनी अद्भुत क्यों है:

  • गागर में सागर

सभी भाषाओं में से केवल संस्कृत में ही कम से कम शब्दों का प्रयोग करके अधिक  कहने की शक्ति है।

  • संस्कृत और नासा 

कंप्यूटर प्रौद्योगिकी में संस्कृत शोध के अनुसार, संस्कृत कंप्यूटर के लिए सबसे उपयुक्त भाषाओं में से एक है।अमेरिका सहित कुल 17 देशों में ऐसे विश्वविद्यालय हैं जो पूरी तरह से संस्कृत को समर्पित हैं और उनका एकमात्र उद्देश्य इस विषय पर शोध करना है।

  • ध्वन्यात्मक रूप से सटीक!

ध्वन्यात्मक रूप से संस्कृत सबसे सटीक भाषा है,जो विभिन्न प्रकार के शब्दों के उच्चारण को बहुत अलग बनाती हैं। इसके उच्चारण में कंपन्न होने के कारण वाक उपचार में भी इसका प्रयोग किया जा रहा है |

  • मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार करता है!

शोध बताते हैं कि संस्कृत सीखने से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार होता है।  संस्कृत स्मरण शक्ति को बढ़ाती है। लंदन के जेम्स जूनियर स्कूल ने संस्कृत को अनिवार्य कर दिया है। इस स्कूल के छात्र साल दर साल विभिन्न क्षेत्रों और दुनिया भर की परीक्षाओं में अव्वल रहे हैं। आयरलैंड के कुछ स्कूलों ने भी संस्कृत को अनिवार्य कर दिया है।

  • भारत की राष्ट्रीय भाषा!

अरबों के आक्रमण से पहले, संस्कृत भारतीय उपमहाद्वीप की राष्ट्रीय भाषा थी। तीन विश्व धर्मों- हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म ने संस्कृत को अपनी विद्वानों की भाषा के रूप में अपनाया है। इसे देवभाषा भी  माना जाता है। संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं बल्कि संस्कारित भाषा भी है, अतः इसका नाम संस्कृत है।अंततः मैं कहना चाहूंगी कि हमें अपने संस्कार, संस्कृति व संस्कृत पर गर्व होना चाहिए |

जय हिन्द ||

नीलम सिद्धू प्रशिक्षित स्नातक शिक्षिका डीपीएसजी , फरीदाबाद

 

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